बिलासपुर। कृषि विज्ञान केंद्र बिलासपुर एवं कृषि महाविद्यालय बिलासपुर ने डॉ एन.के.चौरे अधिष्ठाता कृषि महाविद्यालय की अध्यक्षता में कृषि विज्ञान केंद्र के सभागार में आज दिनांक 30.04.2025 को अक्ती त्यौहार मनाया. कार्यक्रम की शुरुआत माँ सरस्वती की आराधना उपरांत किया गया . कृषि विज्ञान केंद्र बिलासपुर की प्रभारी डॉ शिल्पा कौशिक ने कृषकों को अक्ती त्यौहार की बधाई के साथ साथ खेती में अक्ती त्यौहार कि महात्ता को बताया . साथ ही उन्होंने बताया की अक्षय तृतीया को छत्तीसगढ़ में अक्ती तिहार के रूप में मनाया जाता है, जिसमें किसान अपनी फसलों की कटाई का जश्न मनाते हैं, इस दिन किसान धरती, पेड़-पौधे, गोधन और कृषि औजारों की पूजा करते हैं, जो उनके जीवन के लिए महत्वपूर्ण हैं. अक्षय तृतीया को समृद्धि और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है, और किसान इस दिन शुभ कार्यों का आरंभ करते हैं, जैसे कि नई वस्तुएँ खरीदना या कृषि कार्य करना. कृषि महाविद्यालय के वज्ञानिक डॉ गीत शर्मा ने खेती में बीज के उचित प्रयोग , बीज उपचार के महत्तव, खेती में अक्षय तृतीया के इस दिन से प्रारम्भ किए गए कार्य अथवा इस दिन को किए गए दान का कभी भी क्षय नहीं होता बताया । अक्षय तृतीया का दिन अक्षय कृषि के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व को समाहित किए हुए इस दिन को बीज, फल, विषमुक्त औषधि, समृद्धि, सौभाग्य और सफलता का प्रतीक माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन किसान अपनी फसल की कटाई का जश्न मनाते हैं, जो कृषि कर्म का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।डॉ संजय वर्मा वज्ञानिक कृषि महाविद्यालय बिलासपुर ने अदरक एवं हल्दी की खेती के साथ साथ उनके उन्नत बीज कहाँ से प्राप्त करे की जानकारी डी .कृषकों को प्रेरित किया की वे कहाँ से सब्जी की खेती के लिए उपयुक्त बीज प्राप्त करें. कार्यक्रम में भारतीय किसान संघ के श्री लक्ष्मी साहू ने बरम जी की महता को कृषि में बताया साथ ही अक्षय तृतीय के महत्व को मांगलिक बताया . डॉ डॉ एन.के.चौरे अधिष्ठाता कृषि महाविद्यालय ने प्राकृतिक खेती एवं जैविक खेती को बढ़ावा देते हुए कृषकों से आग्रह किया की खेतों में कम से कम रासायनिक खाद एवं कीटनाशक का प्रयोग करें. कार्यक्रम का सञ्चालन डॉ निवेदिता पाठक ने किया तथा डॉ चंचला रानी पटेल ने धन्यवाद् ज्ञापन दिया. कार्यक्रम को सफल बनाए में कृषि विज्ञानं केंद्र बिलासपुर के वैज्ञानिक डॉ अमित शुक्ल एवं श्रीमत शुशीला ओहदार का विशेष योगदान रहा. तथा कृषकों को केंद्र की तरफ से बीज एवं अमरुद के पौधे का वितरण क्या गया.
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