काव्य प्रत्यूषा एवं पाँच आगर एक कोरी पुस्तकों का भी होगा लोकार्पण
राज्य की प्रतिष्ठित साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था वक्ता मंच, रायपुर द्वारा आयोजित ‘प्रदेशस्तरीय काव्य महाकुंभ 2026’ के गौरवशाली अवसर पर खैरा जयरामनगर के सुप्रसिद्ध कवि, लेखक एवं साहित्यकार उमेश कुमार श्रीवास को उनके उल्लेखनीय साहित्यिक अवदान हेतु राज्यस्तरीय साहित्य सम्मान से अलंकृत किया जाएगा। साहित्य, लोकसंस्कृति एवं जनचेतना के क्षेत्र में सतत सक्रिय रहकर अपनी विशिष्ट साहित्यिक पहचान स्थापित करने वाले श्रीवास का चयन इस प्रतिष्ठित सम्मान हेतु किया जाना सम्पूर्ण साहित्य-जगत के लिए गौरव एवं हर्ष का विषय माना जा रहा है।
आयोजन समिति द्वारा प्रदत्त जानकारी के अनुसार यह भव्य एवं गरिमामय सम्मान समारोह आगामी 31 मई 2026 को प्रातः 11 बजे, रायपुर के सिविल लाइन स्थित वृंदावन सभागृह में आयोजित होगा। समारोह में प्रदेशभर से प्रख्यात साहित्यकार, कवि, पत्रकार, चिंतक, शिक्षाविद्, बुद्धिजीवी एवं विविध सांस्कृतिक संस्थाओं से जुड़े गणमान्य नागरिकों की गरिमामयी उपस्थिति रहेगी। यह आयोजन न केवल साहित्यिक चेतना का महोत्सव सिद्ध होगा, अपितु लोकभाषा, लोकसंस्कृति एवं सृजनशीलता के संरक्षण एवं संवर्धन का भी एक महत्त्वपूर्ण अध्याय बनेगा।
विशेष आकर्षण के रूप में इस अवसर पर साहित्यकार उमेश कुमार श्रीवास की दो बहुचर्चित कृतियों — “काव्य प्रत्यूषा” (दोहा संग्रह) एवं “पाँच आगर एक कोरी” (छत्तीसगढ़ी गीत संग्रह) — का विधिवत विमोचन भी संपन्न होगा। “काव्य प्रत्यूषा” में जीवन-दर्शन, सामाजिक संवेदनाओं, मानवीय मूल्यों एवं नैतिक चेतना को दोहों के माध्यम से अत्यंत प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त किया गया है, वहीं “पाँच आगर एक कोरी” छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति, ग्रामीण जीवन, लोकभावनाओं एवं माटी की सोंधी सुगंध से ओत-प्रोत गीतों का सजीव संकलन है। इन कृतियों में लोकजीवन की आत्मा, जनमानस की वेदना एवं सांस्कृतिक अस्मिता का अत्यंत मार्मिक एवं सशक्त चित्रण दृष्टिगोचर होता है।
उमेश कुमार श्रीवास का साहित्यिक व्यक्तित्व बहुआयामी सृजनशीलता का परिचायक है। उनकी लेखनी में समाज के प्रति संवेदना, राष्ट्र के प्रति समर्पण तथा लोकजीवन के प्रति आत्मीय अनुराग स्पष्ट परिलक्षित होता है। वे साहित्य को केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक जागरण, सांस्कृतिक संरक्षण एवं जनमानस के परिष्कार का सशक्त साधन मानते हैं। उनकी रचनाएँ मानवीय मूल्यों, सामाजिक सरोकारों तथा लोकजीवन की यथार्थ अनुभूतियों से अनुप्राणित रहती हैं।
प्रदेशस्तरीय काव्य महाकुंभ 2026 के इस गरिमामय आयोजन में उमेश कुमार श्रीवास का सम्मान एवं उनकी पुस्तकों का लोकार्पण साहित्य-जगत के लिए एक स्मरणीय एवं ऐतिहासिक क्षण सिद्ध होगा। साहित्य एवं संस्कृति के प्रति उनका यह समर्पण नवोदित रचनाकारों के लिए प्रेरणा-पुंज के रूप में सदैव स्मरणीय रहेगा।
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