मस्तूरी। जनपद क्षेत्र के ग्राम पंचायत भिलौनी में पचपेड़ी तहसीलदार का एक तरफा कार्यवाही देखने को मिला, एक ओर जहां खुद तहसीलदार साहब यह बताते फिर रहे हैं कि लगातार अवैध रेत खनन की शिकायत ग्रामीणों के द्वारा लगातार आ रही थी जिस पर संज्ञान लेते हुए उन्होंने भिलौनी पहुंचकर लगभग 20 ट्रैक्टर ट्राली को मौके पर पकड़ कर बड़ी कार्यवाही की है, लेकिन वही अब ग्राम पंचायत भिलौनी के ग्रामीणों में तहसीलदार के खिलाफ आक्रोश होते दिख रहे हैं, क्योंकि भिलौनी के रेट घाट में रेट परिवहन करवाने के लिए ग्राम पंचायत के कुछ जनप्रतिनिधि 15दिनो से रॉयल्टी के नाम पर अवैध वसूली कर परट्रिप 200 से ₹300 अवैध वसूली कर रहे थे, और अपने संरक्षण में रेत का अवैध परिवहन करवा रहे थे, मौके पर पहुंचे पचपेड़ी तहसीलदार ने रेत घाट पर दलाली कर रहे रॉयल्टी वसूली करने वालों पर कोई प्रकार की कानूनी कार्यवाही नहीं की, नहीं इनके बारे में कोई प्रकार के जिक्र भी नहीं किया, जिसके कारण अब ग्रामीणों में तहसीलदार के खिलाफ रोस देखने को मिल रहा है,और ग्रामीणों का आरोप है कि रायल्टी के नाम पर अवैध वसूली करने वाले दलालों और राजस्व विभाग के कर्मचारियों अधिकारियों से मिली भगत होने के कारण ही 15 दिनों से बेधड़क दिन रात अवैध रेत खनन का कार्य चल रहा था, और अब जिला स्तर के उच्च अधिकारी से शिकायत होने के पश्चात यह कार्यवाही हुई है, जिसमें अवैध रेत खनन करवा रहे दलालों को अभय दान देते हुए, वाहवाही रूपी एक तरफा कार्यवाही सिर्फ ट्रैक्टर वाहनों पर ही किया गया है,और दलालों को साथ गांठ कर छोड़ा गया है करने की बात अब जगह-जगह चर्चा का विषय बना हुआ है। आखिरकार तहसीलदार साहब की ऐसी क्या मजबूरी है जो अवैध वसूली करने वाले दलालों के ऊपर उसकी कलम नहीं चली। और ट्रैक्टरों पर कार्यवाही कर अपने ही पीठ थपथपा रहे हैं।

सत्ताधारी पार्टियों की जनप्रतिनिधियों से भी बातचीत में हुई है बहस
मिली जानकारी के अनुसार तहसीलदार साहब की एक तरफा कार्यवाही पर सत्ताधारी पार्टी के कुछ जनप्रतिनिधि से बहस भी हुई है, कार्यवाही में पकड़े गए ट्रैक्टर कोई राजनीतिक पार्टी के नेता के हैं या फिर कार्यकर्ता के हैं जिसकी वजह से उन्होंने चर्चा करते हुए रेत घाट में एकतरफा कार्यवाही को लेकर अवैध वसूली करने वाले दलालों के ऊपर कार्यवाही नहीं करने और ट्रैक्टर वाहनों पर कार्यवाही करने को लेकर बहस भी हुए हैं।
वहीं वही इस मामले में पचपेड़ी तहसीलदार का कहना है कि ग्रामीणों के द्वारा कोई प्रकार की लिखित शिकायत रॉयल्टी लेने वालों के ऊपर नहीं दिया गया इस वजह से उन पर कार्यवाही नहीं हो पाई है।
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