मस्तूरी। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना “जी राम जी योजना” अब जमीनी स्तर पर सवालों के घेरे में आ गई है। योजना के तहत काम करने वाले मजदूरों को पिछले 3 महीनों से मजदूरी का भुगतान नहीं किया गया है, जिससे मजदूरों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। ग्रामीणों और मजदूरों का आरोप है कि डबल इंजन के सरकार द्वारा मनरेगा के विकल्प के रूप में शुरू की गई इस योजना में शुरुआत से ही लापरवाही, कमीशनखोरी और भ्रष्टाचार हावी है। हालात इतने खराब हैं कि योजना अपने शुरुआती दौर में ही गर्त में जाती नजर आ रही है।
मजदूरों की जेब खाली, अधिकारी बेखबर:-
मजदूरों का कहना है कि उन्होंने योजना के तहत लगातार काम किया, लेकिन 3 महीने बीत जाने के बाद भी भुगतान नहीं हुआ, जिससे उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।वहीं जिम्मेदार अधिकारी और इंजीनियर कार्यालयों से बाहर निकलकर जमीनी हकीकत देखने तक नहीं पहुंच रहे, जिससे भ्रष्टाचार को खुली छूट मिल रही है।स्थानीय लोगों का आरोप है कि यदि अधिकारी गांवों में जाकर कार्यों का निरीक्षण करें तो गुणवत्ता की सच्चाई सामने आ जाएगी। कागजों में काम पूरा और गुणवत्तापूर्ण दिखाया जा रहा है, जबकि हकीकत में कई जगहों पर घटिया निर्माण और अधूरे कार्य के साथ साथ 70%से ज्यादा डबरी निर्माण जेसीबी मशीन से खुदाई हुआ देखने को मिल रहे हैं।

रोजगार सहायकों पर मनमानी के आरोप:-
मस्तूरी जनपद के योजना में लगे रोजगार सहायकों पर भी मनमानी और मिलीभगत के गंभीर आरोप लग रहे हैं। कहा जा रहा है कि नियमों को ताक पर रखकर कार्य कराया जा रहा है और डबरी निर्माण जैसे कार्यों में भी धांधली और घोटाले की शिकायतें सामने आ रही हैं।इतनी बड़ी योजना में सिर्फ 3 महीने के भीतर ही इस तरह की अव्यवस्था और भ्रष्टाचार सामने आना सरकार की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।
अब देखना होगा कि सरकार और जिम्मेदार अधिकारी इस पर कब तक संज्ञान लेते हैं और मजदूरों को उनका हक कब तक मिल पाता है।

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