भारत सम्मान के प्रमुख संपादक जितेंद्र कुमार जायसवाल ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से मुलाक़ात कर पिछली सरकार में पत्रकारों पर हुए ज़्यादती एवं पुलिसिया क़हर के विषय में विस्तृत चर्चा की.
जितेंद्र ने मुख्यमंत्री को बताया कि भारत सम्मान ने पिछली सरकार में छत्तीसगढ़ के आदिवासियों की ज़मीनों को अवैध तरीक़े से हड़पने वालों के विरुद्ध बिना किसी भय एवं लालच के पूरी ईमानदारी से पत्रकारिता किया जिससे ना केवल पूर्व सरकार से संरक्षण प्राप्त भू-माफियाओं को जेल जाना पड़ा बल्कि आदिवासियों की कई मामलों में हड़पी गई ज़मीनें उन्हें वापस भी मिलीं.
मुख्यमंत्री को स्मरण कराते हुए जितेंद्र ने अंबिकापुर में हुए पंकज बेक कस्टोडियल डेथ के मुद्दे पर भी बात की और याद दिलाया कि प्रदेश के भूतपूर्व गृह-मंत्री रामसेवक पैंकरा के नेतृत्व में गठित जाँच कमेटी ने अपने रिपोर्ट में पंकज बेक की हत्या होना बताया था. कांग्रेस की सरकार में आदिवासी पंकज बेक को इंसाफ़ तो नहीं मिला हाँ ! बड़ी बेशर्मी से उक्त घटना में मुख्य आरोपी तात्कालीन निलंबित इंस्पेक्टर को पूर्व स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव क्रिकेट मैच का फ़ीता कटवाते दिखे थे अब इस सरकार में भी नयाय ना मिले तो पीड़िता आख़िर कहाँ जाए?

मुख्यमंत्री से हुई व्यक्तिगत मुलाक़ात में भारत सम्मान के द्वारा प्रदेश के पुलिस परिवार आंदोलन, सरगुजा लखनपुर चौकी अंतर्गत ग्राम कुन्नी चौकी में नाबालिक बच्ची पर पुलिस द्वारा दुष्कर्म के मामले में भारत सम्मान की भूमिका की याद दिलाई. प्रदेश में हो रहे अन्याय के विरुद्ध लड़ने वाले क्रांतिकारी पत्रकारों को भूपेश सरकार ने झूठे मुक़दमों में फँसाकर जेल भेजा जितेंद्र ने स्वयं का उदाहरण देते हुए बताया कि पुलिस बर्बरता का वे किस प्रकार वे स्वयं शिकार हुए हैं जिसके अंतर्गत पिछली सरकार ने 11 झूठे मामले उनपर गढ़ कर षड्यंत्र पूर्वक उन्हें जेल में रखा, भूपेश सरकार में क़ानून व्यवस्था की हालत इतनी बदतर हो गई थी उनकी गिरफ़्तारी पर भू-माफिया, गुंडे और अपराधी अंबिकापुर देहात थाने में पुलिस की जय-जयकार कर रहे थे.
पत्रकारों पर हुए अत्याचारों पर मुख्यमंत्री को सौंपें अपने विस्तृत ज्ञापन एवं प्रामाणिक दस्तावेजों के आधार पर जितेंद्र ने स्वयं के मामले सहित प्रदेश में हुए इस तरह के अन्य मामलों पर विशेष जाँच दल गठित कर जाँच उपरांत सभी फर्जी मामलों को सरकार द्वारा वापस लेने की माँग की जिसपर मुख्यमंत्री ने दस्तावेजों का सरसरी तौर पर मुआयना किया एवं मामले को देखने की बात कही.
भारत सम्मान के प्रधान संपादक का कहना है कि पिछली सरकार में जो जुल्म हुए वे अपनी जगह है लेकिन सरकार बदलने के बाद भी पत्रकारों को प्रताड़ित करना चिंता का विषय है. आगे जितेंद्र ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि, चुनावों में उलझे होने के कारण वर्तमान सरकार अचार संहिता लागू होने के कारण एक्शन मोड में नहीं आ पायी थी जिसका लाभ लेकर कांग्रेस शासन काल में मलाई काट चुके अधिकारियों ने चापलूसी से वर्तमान सरकार में भी अपनी कुर्सी बचायी हुई है और वे पिछली सरकार के जुल्म को आगे बढ़ाने का कार्य करते हुए वर्तमान सरकार को बदनाम करने का कार्य रहे हैं.
जितेंद्र का कहना है कि वर्तमान सरकार अभी पूरी तरह से जानता को राहत देने में सफल दिखती प्रतीत नहीं हो रही है उत्तरी छत्तीसगढ़ से लेकर राजधानी रायपुर तक अपराधी बेलगाम हैं, आए दिन चाकू बाजी एवं अन्य गंभीर अपराध गैंगवार आदि धड़ल्ले से चल रहे हैं लेकिन एक पत्रकार का ज़िला बदर किया गया. कांग्रेस के भू-माफियाओं से भाजपा विधायकों की साँठगाँठ है इसलिए वे लगातार आदिवासियों की ज़मीनों को हड़प रहे हैं परंतु सरकार दैनिक अखबार के कार्यालयों एवं संपत्तियों पर बुलडोज़र चलाने में व्यस्त है यदि जल्दी ही प्रदेश मंत्रिमंडल ने कमान अपने हाथ में नहीं लिया तो वर्तमान सरकार पर जो ब्यूरोक्रेसी के भरोसे चलने के आरोप लगते हैं वो सच होता दिखेगा और सरकार को बदनाम होने ने कोई नहीं रोक सकेगा.
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